Thursday, 22 December 2011

सोचा था तेरे जाने के बाद...


सोचा था तेरे जाने के बाद
नज़ाने कितनी राते यादों मे बीत जाएँगी
कम्बख़्त पहली ही रात
चैन की नींद आयी

नज़ाने कितने ख्वाब देखे थे
मैने अपनी जुदाई के
हर ख्वाब मे तेरी याद थी और हर याद मे गम
टूटा हुआ दिल और तनहा राते
कैसे सह पाएँगे हम
नज़ाने क्यूँ मगर
एक अजीब सी खुशी छाई है
तेरे जाने के बाद
हर लमहे की हँसी लौट आयी है
अब ना टूटा हुआ दिल है और ना रातों मे तनहाई
कम्बख़्त पहली ही रात चैन की नींद आयी

सोचा था तेरे जाने के बाद
हर शक्स अजनबी होगा
मयखाने मे गुज़रेगी हर श्याम
और हर गम रूबरू होगा
नज़ाने क्यूँ मगर
मे मस्ती मे झूम रहा हूँ
तेरे जाने की खुशी मे
दिन रात पी रहा हूँ
अब ना तू है ना तेरे जाने का गम
और ना दुखों की गहराई
कम्बख़्त पहली ही रात चैन की नींद आयी

सोचा था तेरे जाने के बाद
किसी मोड़ पर अचानक
फिरसे मुलाकात होगी
" मैने तुम्हे पहले भी कहीं देखा है "
यही कहोगी तुम
और उसी मोडपर मेरी कयामत होगी
नज़ाने क्यूँ मगर
इन बाहों को अब तेरा इंतेज़ार नहीं है
मुलाकात होगी तो शायद तुम्हे पहचान लेंगे
इतना भी अब यकीन नही है
ज़रा गौर से सुन ए बेवफा
तू नही तो और सही , और नही तो कोई और सही
कम्बख़्त पहली ही रात चैन की नींद आयी

-- भालचंद्र भुतकर

3 comments:

  1. kya baat hai be meri seekh ka bahut asar ho raha hai tujhe pe ...
    chal achha haisudhargaya tu...

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  2. सही रे… मस्त…

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